मंगलवार, 2 सितंबर 2008
वैलेंटाइन डे
वैलेंटाइन डे का इतिहास
सोमवार, 1 सितंबर 2008
काला बन्दर
काला बन्दर
काला बन्दर... एक अफवाह या सच। कुछ लोग कहते है की यह जादूगरों (तांत्रिकों) का किया धारा है तथा कुछ लोग इसे आतंकवादिओं की साजिश समझते है । काले बन्दर का आतंक गाजियाबाद से शुरू हुआ। गाजियाबाद में काले बन्दर के हमले और दहशत जारी थी। गाजियाबाद में मानवरूपी काले बन्दर ने चार जगह हमले कर सात लोगों को घायल कर दिया। काले बन्दर का हमला न्यू गाँधी नगर के मकान (११४) में हुई। अशोक ने देखा की टंकी के पास काला बन्दर बैठा हुआ है। अशोक ने एक पाइप उठा कर बन्दर पर वार किया तो उसके शरीर में करंट दौड़ गया। उस बन्दर ने अशोक से पाइप छीन कर वापस उसके सर पर वार किया । अशोक ने फिर भी एक जग में पानी भरा और उस बन्दर पर फेंका वह बन्दर छज्जे पर उतरा और कहीं गायब हो गया। इससे पता चलता है की काला बन्दर पानी से डरता है। पूछताछ के दोरान अशोक ने बताया की उसके सारे शरीर पर काले बाल थे और चेहरा भयानक था । काले बन्दर की दहशत इतनी थी की अगर रात को एक व्यक्ति दुसरे से छू जाए तो काला बन्दर समझकर दोनों ही डर जायेंगे ।
अभी तक काले बन्दर के हमलों की खबरे गाजियाबाद से मिल रही थी, लेकिन अब पड़ोस का शहर गौतमबुद्ध नगर भी इससे न बच सका। सूर्य प्रकाश नाम का व्यक्ति राष्ट्रीय मार्ग से गुजर रहा था। तभी एक मारुती कार आकर रुकी उसमे से एक नकाबपोश निकला और अपने स्टील के पंजों से सूर्य प्रकाश की छाती पर गहरा वार किया। आश्चर्य की बात यह थी की इस बार काला बन्दर न तो उड़ कर आया और न ही गायब होकर , वह इस बार एक कार में आया हमला किया और चला गया। इन घटनाओ के दौरान इतनी दहशत थी की एक महिला लघुशंका के लिए रात को उठी, उसने बाथरूम का बल्ब जलाया तो रोशनी में उसे अपनी परछाई दिखी। अपनी परछाई उसे काला बन्दर लगी, उसे देखकर वो बेहोश हो गयी और गिर गयी। गिरने से दीवार्र पर लगी कील से उसके हाथ में खरोंच लग गयी।
कोई कहता है की काला बन्दर हमला कर उड़ जाता है, जब उनसे पूछा जाता है की क्या उसने उसे उड़ते देखा है तब वह कहता की देखा नही सुना है। काले बन्दर का आतंक उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के मानसरोवर पार्क, न्यू उस्मान पुर, हर्ष विहार, शास्त्री पार्क, केथवाडा, गौतमपुरी, ब्रह्मपुरी और निर्माण विहार और पूर्वी दिल्ली के मंडावली, आनद विहार और कृष्ण नगर में था।
डाक्टरों ने बताया की काले बन्दर द्वारा दी गयी खरोंचओं से रेबीज के होने की आशंका नही है क्योंकि वह जानवरों के पंजों के निशान नही है।
पूर्वी दिल्ली के एक घर में माँ अपनी नटखट बच्ची से कहती है की सोजा नही तो काला बन्दर आ जाएगा । इस पर उसकी बेटी मुंह छिपाकर सो गयी। लोगों का है मनाना की काला बन्दर साधारण आदमी नही है क्योंकि वह चार मंजिला छत से आसानी से कूद जाता था। इस सम्बन्ध में पुलिस सूत्रों का कहना है की यह सब बकवास है। उनका कहना था की जिस तरह गणेश जी ने दूध पिया था उसी तरह इसमे भी कोई दिलचस्प वाकया जरुर निकलेगा। अब तो काले बन्दर के नाम पर लोग अपनी आपसी दुश्मनी भी निकल सकते थे। काले बन्दर के आने से लोगों को कुछ फायदा तो बहुत ज्यादा नुकसान था। काले बन्दर की घटना एक ऐसी घटना थी जिसके आने से लोगों में दहशत फेल गयी थी और अब जब वो चला गया है, लोग शान्ति से अपना जीवन बिता रहे है ।